आज हुआ इस देश का जो हाल है,
हुई देश की जनता बेहाल है|
कोई पूछो ज़रा सत्ता के हुक्मरानों से,
की हुआ ऐसा क्या फिलहाल है|
जो आया जन-जन की अर्थव्यवस्था मैं भूचाल है||
मत पूछो उनसे नहीं तो वो डंडे बरसाएंगे ,
और लोकतंत्र की हत्या करने से भी न घबराएंगे,
फिर बाद में हम पर ही लोकतंत्र को तार-तार करने का आरोप लगायेंगे||
हुई देश की जनता बेहाल है|
कोई पूछो ज़रा सत्ता के हुक्मरानों से,
की हुआ ऐसा क्या फिलहाल है|
जो आया जन-जन की अर्थव्यवस्था मैं भूचाल है||
मत पूछो उनसे नहीं तो वो डंडे बरसाएंगे ,
और लोकतंत्र की हत्या करने से भी न घबराएंगे,
फिर बाद में हम पर ही लोकतंत्र को तार-तार करने का आरोप लगायेंगे||
aaya arhtavyavastha me bhoochal hai,
ReplyDeletedesh ki janta pooch rahi ye sawal hai,
satta me baitha kyo hua malamal hai?
menhgai ki tapish jo mahsoos kara sake unko,
aisa kon mai ka lal hai.....?
zanta ka kavi gaurav dubey.....
ReplyDeleteधन्यवाद जो आपने हमारी कविता में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया......|
ReplyDeleteआप काफी अच्छा लिख लेते हैं||